देश के हर राज्य को चाहिए मोदी-योगी जैसे समर्पित नेतृत्वकर्ता : श्याम कुमार गुप्ता

निःस्वार्थ राष्ट्रसेवा और सर्वसमाज हित की भावना ही नेतृत्व की असली पहचान : श्याम गुप्ता

रायगढ़। प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश सचिव एवं नागरिक सुरक्षा सेवा संगठन के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष रेंसी श्याम कुमार गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली और समर्पण का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के प्रत्येक राज्य में ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है, जो राष्ट्रहित, जनहित और सर्वसमाज के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दे।
श्याम गुप्ता ने स्पष्ट किया कि उनके इस कथन को किसी राजनीतिक दल या संगठन के समर्थन अथवा विरोध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह उनके व्यक्तिगत अनुभव, सामाजिक कार्य और मीडिया से जुड़े लंबे अनुभव से निकला एक निष्पक्ष विचार है।
उन्होंने कहा, “बचपन से लेकर आज तक मैंने अनेक प्रकार के नेतृत्व देखे हैं, लेकिन जिस प्रकार का समर्पण और राष्ट्रहित की भावना मुझे मोदी जी और योगी जी के नेतृत्व में दिखाई देती है, उसी अनुभव के आधार पर मैं यह बात कह रहा हूं।”
उन्होंने कहा कि उनके अनुसार नेतृत्व का वास्तविक मूल्यांकन इस बात से होना चाहिए कि कोई व्यक्ति राष्ट्रहित, सर्वसमाज हित और जनहित के लिए कितना निःस्वार्थ भाव से कार्य करता है। उन्होंने कहा कि जब कोई नेतृत्वकर्ता अपने व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों से ऊपर उठकर व्यापक समाज और राष्ट्र के हित में काम करने का प्रयास करता है, तो वह आने वाली पीढ़ियों के लिए उदाहरण बनता है।
श्याम गुप्ता ने कहा कि मीडिया से जुड़े होने और सामाजिक संगठन के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों के बीच काम करने के कारण उन्होंने समाज और नेतृत्व को करीब से देखने का अवसर पाया है। इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने यह विचार रखा है कि देश के प्रत्येक राज्य के जनप्रतिनिधियों और नेतृत्वकर्ताओं को सेवा, समर्पण, जनहित और राष्ट्रहित को अपने सार्वजनिक जीवन का केंद्र बनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि “मेरा उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का पक्ष लेना नहीं, बल्कि नेतृत्व की उस कार्यशैली की चर्चा करना है, जिसमें राष्ट्र और समाज का हित व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर हो। देश के भविष्य और युवा पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य के लिए ऐसी सेवा भावना पर गंभीर चिंतन होना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अलग-अलग विचार होना स्वाभाविक है, लेकिन विकास और जनकल्याण के लिए निष्पक्षता, जवाबदेही, सेवा भावना और राष्ट्रहित जैसे मूल्यों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

