“ये अवसरवाद और छल-कपट का युग है, चुनाव आते ही शुरू हो जाती है दल-बदल की होड़” — श्याम कुमार गुप्ता

“राजनीति जनसेवा का माध्यम कम, मेवा खाने का माध्यम ज्यादा बनती जा रही है; समर्पित कार्यकर्ता आज भी संगठन की असली ताकत”

रायगढ़। वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में बढ़ते अवसरवाद और चुनाव के समय होने वाले दल-बदल को लेकर प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश सचिव श्याम कुमार गुप्ता ने अपनी बात रखते हुए कहा कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते हैं, वैसे-वैसे राजनीतिक दलों में आने-जाने वालों की होड़ दिखाई देने लगती है। उन्होंने कहा कि आज राजनीति में जनसेवा की भावना के बजाय व्यक्तिगत हित और राजनीतिक लाभ की प्रवृत्ति बढ़ती दिखाई दे रही है।
श्याम कुमार गुप्ता ने कहा कि चुनाव के समय कुछ नेता अपनी पसंद और राजनीतिक सुविधा के अनुसार दल बदलते हैं। जब उनसे इसका कारण पूछा जाता है तो अक्सर यही जवाब सामने आता है कि उन्हें संबंधित पार्टी या संगठन में सम्मान नहीं मिला। उन्होंने कहा कि घर हो या संगठन, हर जगह समर्पण और निष्ठा का अपना महत्व होता है। जो व्यक्ति लंबे समय तक संगठन के लिए मेहनत करता है, उसकी भूमिका और योगदान को भी उसी आधार पर स्थान मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज शॉर्टकट और बायपास की राजनीति के कारण कुछ लोग कम समय में बड़े पद और बड़े राजनीतिक लाभ हासिल करना चाहते हैं। इसी सोच ने दल-बदल की प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया है। राजनीति में विचारधारा, संगठन और कार्यकर्ताओं के प्रति निष्ठा का महत्व कम होना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए विचारणीय विषय है।
उन्होंने कहा कि पार्टी और संगठन के प्रति सच्चा समर्पण रखने वाला कार्यकर्ता किसी पद या व्यक्तिगत प्रलोभन के लिए बार-बार अपना राजनीतिक रास्ता नहीं बदलता। ऐसे समर्पित कार्यकर्ता ही किसी भी संगठन की वास्तविक ताकत होते हैं।
श्याम कुमार गुप्ता ने कहा कि राजनीतिक दलों को भी अपने जमीनी और समर्पित कार्यकर्ताओं के योगदान का सम्मान करना चाहिए, ताकि राजनीति में अवसरवाद के बजाय विचार, सिद्धांत, सेवा और संगठन के प्रति निष्ठा को महत्व मिल सके।