नोटिस, जांच और एफआईआर के बाद बैजन्ती लहरे पर सवाल, पीड़ित सरपंचों के सामने लाइव डिबेट की चुनौती

पूर्व कलेक्टर कार्तिके गोयल और वर्तमान कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के नोटिस के बाद जांच, फिर एफआईआर दर्ज

करोड़ों रुपये के सरकारी काम तीन साल से लंबित होने का आरोप, नंदू लहरे परिवार से जवाब मांग रहे पीड़ित सरपंच

रायगढ़। ग्राम पंचायतों में सरकारी राशि से जुड़े कार्यों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। आरोप लगाने वालों का कहना है कि करोड़ों रुपये के सरकारी कार्य कथित रूप से पिछले तीन वर्षों से लंबित रखे गए हैं। इसी मामले को लेकर पूर्व कलेक्टर कार्तिके गोयल और वर्तमान कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के कार्यकाल में लगातार नोटिस जारी किए गए तथा जांच के बाद एफआईआर दर्ज हुई है।
आरोप लगाने वालों का कहना है कि कार्रवाई और जांच के बावजूद अब पूरे मामले में सफाई देने की कोशिश की जा रही है। उनका सवाल है कि यदि बैजन्ती लहरे और नंदू लहरे परिवार स्वयं को इन आरोपों से अलग और निर्दोष मानता है, तो पीड़ित बताए जा रहे सरपंचों के सामने लाइव डिबेट में आकर सरकारी राशि, लंबित कार्यों, नोटिस, जांच और एफआईआर से जुड़े सवालों का सीधे जवाब क्यों नहीं दिया जाता?
आरोप लगाने वालों ने बैजन्ती लहरे को सार्वजनिक बहस की चुनौती देते हुए कहा कि वे पीड़ित सरपंचों के सामने आएं और पूरे मामले पर अपना पक्ष रखें। उनका दावा है कि आमने-सामने सवाल-जवाब होने पर “दूध का दूध और पानी का पानी” हो जाएगा।
साथ ही सवाल यह भी उठ रहा है कि जिन ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए राशि स्वीकृत होने का दावा किया जा रहा है, वहां यदि कार्य लंबित हैं तो इसका खामियाजा सीधे गांव की जनता को भुगतना पड़ रहा है। विकास कार्यों में देरी से ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं से वंचित रह रहे हैं। ऐसे में बैजन्ती लहरे इस पूरे मामले पर क्या कहेंगी? क्या वे पीड़ित सरपंचों और ग्रामीणों के सामने आकर स्वीकृत राशि, लंबित कार्यों और अपनी भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट करेंगी?
