छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा की पहल

छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा की पहल


देवपुर घाटी में औषधीय पौधों की खोज यात्रा सम्पन्न
10 किलोमीटर की की गई ट्रेकिंग
200 औषधीय पौधे खोजे एवं एकत्र किए गए


पिथौरा देवपुर के जंगलों में छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा एवं वन विभाग जिला बलौदाबाजार-भाटापास के संयुक्त तत्वावधान में जल जंगल यात्रा औषधीय पौधों की खोज यात्रा का आयोजन वन मंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर के मार्गदर्शन में 10 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक देवपुर की घाटी में की गई।
विगत 22 वर्षों से औषधीय पौधों की खोज यात्रा छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा द्वारा छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उड़ीसा राज्यों के वनों में किया जा रहा है जिसके अंतर्गत स्थानीय वैद्यों, टैक्सोनोमिस्ट, भू-गर्भ विज्ञानी, वनस्पति विज्ञानी, जन्तु विज्ञानी आयुर्वेद चिकित्सालयों के विद्यार्थियों, सामान्यजन को साथ लेकर औषधीय पौधों की खोज यात्रा की जाती रही है।
इस वर्ष यह यात्रा जिला बलोदा बाजार-भाटापारा के वन क्षेत्र देवपुर की घाटी में जल जंगल यात्रा के नाम से की गई इसमें स्थानीय वन विभाग के सहयोग से देवपुर के लगभग 10 किलोमीटर की यात्रा संपत्र की गई जिसमें लगभग 200 औषधीय पौधे खोजे एवं एकत्रित किए गए।
इस यात्रा में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से 100 से अधिक खोज यात्री शामिल हुए। इस खोज का नेतृत्व प्रसिद्ध वनस्थति टैक्सोनॉमिस्ट प्रो. एम. एल. नायक ने किया।
इस यात्रा में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, कोरबा, रायपुर, धमतरी, गरियाबंद, बालौदाबाजार-भाटापारा , महासमुंद तथा अन्य जिलों से प्रतिभागी सम्मिलित हुए।
इस यात्रा कार्यक्रम के अनुसार संपूर्ण छत्तीसगढ़ के खोजी 10 तारीख को शायं 04 बजे तक वन प्रशिक्षण केंद्र देवपुर में एकत्रित हुए, अगले दिन सुबह 8 बजे देवपुर की घाटी में अलग-अलग 03 दलों में विभक्त होकर पौधों को एकत्रित करने हेतु जंगल में निकले एवं दोपहर 02 बजे तक सभी वापस बेस कैम्प वापस आ गए एवं भोजन पश्चात सायं 05 बजे से एक सामान्य परिचर्चा कर उन पौधों के स्थानीय नाम के साथ वानस्पतिक नाम सह उनके रहवास, औषधीय गुणों, उनके संरक्षण पर चर्चा की गई। इसमे वनस्पति विज्ञान के छात्राएं आयुर्वेद चिकित्सा महाविद्यालय बिलासपुर के छात्र-छाएं तथा अन्य जन औषधि पौधों में रुचि रखने वाले सम्मिलित हुए।
इस खोज यात्रा में जहां सामान औषधीय पौधे जैसे सफेद मुसली, काली मुसली, सतावर, अनंतमूल, सारिवा, भूनिम्ह, केवटी की खोज की गई। वहीं यात्रा के दौरान जीवक निर्मलीभगत कंपिक जैसे दुर्लभऔषधि पौधे भी एकत्रित किए गए, जिनके बारे में विस्तृत जानकारी स्थानीय वैद्यो एवं टेक्सोनामिस्ट प्रो. एम. एस. नायक के द्वारा प्रदाय की गई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रोफेसर एम. एन नायक ने कहा की हमें दुर्लभतम कई सारे औषधियों के संरक्षण की आवश्यकता है, उनके लिए विद्यार्थियों शोधार्थियों तथा प्रशासन को प्रयास करने होंगे। जिनमें उन्होंने बिज रहित लैंड का जो कोंडा गांव में है का भी जिक्र किया, जिसके एक या दो पेड़ ही बचे हैं अतः इनके संरक्षण की अधिक आवश्कता है। इसके अतिरिक शोधार्थियों ने आयुर्वेदिक औषधियों के विपद्धन तथा स्थानिय लोगों द्वारा उनको एकत्रित कर जैव विविधता समितियों के माधाम से बेचकर होने वाले फायदे के बारे में बताया तथा इसके व्यापार को संगठित कर तथा भारत को विश्व मंच पर स्थापित करने के लिए विद्यार्थीयों को आह्वान किया ।
इस पर शोध तथा व्यवसायिक सोच की आवश्यकता पर जोर दिया गया।छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के अध्यक्ष विश्वास मेश्राम जी ने समस्त प्रतिभागिओं को हर वर्ष की भांति शामिल होने के लिए उत्साहवर्धन किया तथा औषधि पौधों की संरक्षण संवर्धन व खोज पर विशेष ध्यान देने की बात कही और औषधीय पौधों की खोज यात्रा का जिक्र करते हुऐ उन्होंने कहा कि यह यात्रा विगत 30 वर्षों से अनवरत चल रही है तथा निश्चित रूप से विभिन्न क्षेत्रों में अनेक उपलब्धियां हासिल किए हैं। औषधि पौधों की खोज यात्रा के संस्मरणों को एक किताब का आकार देने के लिए सभी प्रतिभागिओं से निवेदन किया। कार्यक्रम में कोरबा मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ के. के. सहारे जी ने सीपीआर के माध्यम से लोगों की बहुमूल्य जान कैसे बचाई जा सकती है इस पर चर्चा की।
छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के सचिव डॉ वाई, के. सोना ने विज्ञान सभा की सदस्यता लेकर विभिन्न जिलों में इकाई गठन करने हेतु आग्रह किया। उक्त कार्यक्रम में विशेष रूप से विषय विशेज्ञ के रूप में डॉ स्सेह लता हुमने, हेमंत खुटे , रतन गोंडाने, आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज बिलासपुर के सहायक प्राध्यापक डॉ विवेक दुबे, डॉ सीमा दुबे, दिनेश कुमार कोरबा, जन्तु विज्ञानी वेद व्रत उपाध्याय, प्रो निधि सिंह, डॉ एच एन टंडन, वनस्पति विज्ञानी डॉ गुलाब साहू डॉ सर्वेश पटेल, साथ ही वैद्य- अर्जुन श्रीवास, महेंद्र सैनी , लीला प्रसाद अगरिया, देवनारायण मांझी जी विशेषज्ञ के रूप में सम्मिलित हुए।
हेमंत खुटे ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के बैनर तले हमने प्रकृति शिविर तथा वर्ष 2012 में भी ओषधीय पौधों की खोज यात्रा देवपुर के घने जंगलों में कर चुके हैं। एक दशक के लंबे अंतराल बाद हमें इस शिविर की मेजबानी का मौका मिला।
कार्यक्रम को सफल बनाने में बलौदा बाजार वन मण्डल के वनमण्डलाधिकारी धम्मशील गणवीर, रेंज ऑफिसर संतोष पैकरा, चंद्रहास ठाकुर, वन रक्षक अजीत ध्रुव, भोजन व्यवस्था प्रभारी कलीम खान,परशुराम वीसी, उर्मिला ध्रुव व केयर टेकर पुष्पा चौहान का विशेष योगदान रहा।कार्यक्रम के समापन समारोह में सभी 105 प्रतिभागियों को अतिथियों द्वारा प्रमाण पत्र प्रदाय किए गए।
देवपुर घाटी में औषधीय पौधों की खोज यात्रा सम्पन्न
10 किलोमीटर की की गई ट्रेकिंग
200 औषधीय पौधे खोजे एवं एकत्र किए गए
पिथौरा देवपुर के जंगलों में छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा एवं वन विभाग जिला बलौदाबाजार-भाटापास के संयुक्त तत्वावधान में जल जंगल यात्रा औषधीय पौधों की खोज यात्रा का आयोजन वन मंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर के मार्गदर्शन में 10 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक देवपुर की घाटी में की गई।
विगत 22 वर्षों से औषधीय पौधों की खोज यात्रा छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा द्वारा छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उड़ीसा राज्यों के वनों में किया जा रहा है जिसके अंतर्गत स्थानीय वैद्यों, टैक्सोनोमिस्ट, भू-गर्भ विज्ञानी, वनस्पति विज्ञानी, जन्तु विज्ञानी आयुर्वेद चिकित्सालयों के विद्यार्थियों, सामान्यजन को साथ लेकर औषधीय पौधों की खोज यात्रा की जाती रही है।
इस वर्ष यह यात्रा जिला बलोदा बाजार-भाटापारा के वन क्षेत्र देवपुर की घाटी में जल जंगल यात्रा के नाम से की गई इसमें स्थानीय वन विभाग के सहयोग से देवपुर के लगभग 10 किलोमीटर की यात्रा संपत्र की गई जिसमें लगभग 200 औषधीय पौधे खोजे एवं एकत्रित किए गए।
इस यात्रा में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से 100 से अधिक खोज यात्री शामिल हुए। इस खोज का नेतृत्व प्रसिद्ध वनस्थति टैक्सोनॉमिस्ट प्रो. एम. एल. नायक ने किया।
इस यात्रा में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, कोरबा, रायपुर, धमतरी, गरियाबंद, बालौदाबाजार-भाटापारा , महासमुंद तथा अन्य जिलों से प्रतिभागी सम्मिलित हुए।
इस यात्रा कार्यक्रम के अनुसार संपूर्ण छत्तीसगढ़ के खोजी 10 तारीख को शायं 04 बजे तक वन प्रशिक्षण केंद्र देवपुर में एकत्रित हुए, अगले दिन सुबह 8 बजे देवपुर की घाटी में अलग-अलग 03 दलों में विभक्त होकर पौधों को एकत्रित करने हेतु जंगल में निकले एवं दोपहर 02 बजे तक सभी वापस बेस कैम्प वापस आ गए एवं भोजन पश्चात सायं 05 बजे से एक सामान्य परिचर्चा कर उन पौधों के स्थानीय नाम के साथ वानस्पतिक नाम सह उनके रहवास, औषधीय गुणों, उनके संरक्षण पर चर्चा की गई। इसमे वनस्पति विज्ञान के छात्राएं आयुर्वेद चिकित्सा महाविद्यालय बिलासपुर के छात्र-छाएं तथा अन्य जन औषधि पौधों में रुचि रखने वाले सम्मिलित हुए।
इस खोज यात्रा में जहां सामान औषधीय पौधे जैसे सफेद मुसली, काली मुसली, सतावर, अनंतमूल, सारिवा, भूनिम्ह, केवटी की खोज की गई। वहीं यात्रा के दौरान जीवक निर्मलीभगत कंपिक जैसे दुर्लभऔषधि पौधे भी एकत्रित किए गए, जिनके बारे में विस्तृत जानकारी स्थानीय वैद्यो एवं टेक्सोनामिस्ट प्रो. एम. एस. नायक के द्वारा प्रदाय की गई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रोफेसर एम. एन नायक ने कहा की हमें दुर्लभतम कई सारे औषधियों के संरक्षण की आवश्यकता है, उनके लिए विद्यार्थियों शोधार्थियों तथा प्रशासन को प्रयास करने होंगे। जिनमें उन्होंने बिज रहित लैंड का जो कोंडा गांव में है का भी जिक्र किया, जिसके एक या दो पेड़ ही बचे हैं अतः इनके संरक्षण की अधिक आवश्कता है। इसके अतिरिक शोधार्थियों ने आयुर्वेदिक औषधियों के विपद्धन तथा स्थानिय लोगों द्वारा उनको एकत्रित कर जैव विविधता समितियों के माधाम से बेचकर होने वाले फायदे के बारे में बताया तथा इसके व्यापार को संगठित कर तथा भारत को विश्व मंच पर स्थापित करने के लिए विद्यार्थीयों को आह्वान किया ।
इस पर शोध तथा व्यवसायिक सोच की आवश्यकता पर जोर दिया गया।छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के अध्यक्ष विश्वास मेश्राम जी ने समस्त प्रतिभागिओं को हर वर्ष की भांति शामिल होने के लिए उत्साहवर्धन किया तथा औषधि पौधों की संरक्षण संवर्धन व खोज पर विशेष ध्यान देने की बात कही और औषधीय पौधों की खोज यात्रा का जिक्र करते हुऐ उन्होंने कहा कि यह यात्रा विगत 30 वर्षों से अनवरत चल रही है तथा निश्चित रूप से विभिन्न क्षेत्रों में अनेक उपलब्धियां हासिल किए हैं। औषधि पौधों की खोज यात्रा के संस्मरणों को एक किताब का आकार देने के लिए सभी प्रतिभागिओं से निवेदन किया। कार्यक्रम में कोरबा मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ के. के. सहारे जी ने सीपीआर के माध्यम से लोगों की बहुमूल्य जान कैसे बचाई जा सकती है इस पर चर्चा की।
छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के सचिव डॉ वाई, के. सोना ने विज्ञान सभा की सदस्यता लेकर विभिन्न जिलों में इकाई गठन करने हेतु आग्रह किया। उक्त कार्यक्रम में विशेष रूप से विषय विशेज्ञ के रूप में डॉ स्सेह लता हुमने, हेमंत खुटे , रतन गोंडाने, आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज बिलासपुर के सहायक प्राध्यापक डॉ विवेक दुबे, डॉ सीमा दुबे, दिनेश कुमार कोरबा, जन्तु विज्ञानी वेद व्रत उपाध्याय, प्रो निधि सिंह, डॉ एच एन टंडन, वनस्पति विज्ञानी डॉ गुलाब साहू डॉ सर्वेश पटेल, साथ ही वैद्य- अर्जुन श्रीवास, महेंद्र सैनी , लीला प्रसाद अगरिया, देवनारायण मांझी जी विशेषज्ञ के रूप में सम्मिलित हुए।
हेमंत खुटे ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के बैनर तले हमने प्रकृति शिविर तथा वर्ष 2012 में भी ओषधीय पौधों की खोज यात्रा देवपुर के घने जंगलों में कर चुके हैं। एक दशक के लंबे अंतराल बाद हमें इस शिविर की मेजबानी का मौका मिला।
कार्यक्रम को सफल बनाने में बलौदा बाजार वन मण्डल के वनमण्डलाधिकारी धम्मशील गणवीर, रेंज ऑफिसर संतोष पैकरा, चंद्रहास ठाकुर, वन रक्षक अजीत ध्रुव, भोजन व्यवस्था प्रभारी कलीम खान,परशुराम वीसी, उर्मिला ध्रुव व केयर टेकर पुष्पा चौहान का विशेष योगदान रहा।कार्यक्रम के समापन समारोह में सभी 105 प्रतिभागियों को अतिथियों द्वारा प्रमाण पत्र प्रदाय किए गए।
