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“आत्मनिर्भरता के दौर में रिश्तों की दरार: समझ और सम्मान से ही बच सकते हैं संबंध”

रायपुर छत्तीसगढ़ आज के समय में रिश्तों के टूटने का एक बड़ा कारण यह भी बनता जा रहा है कि आत्मनिर्भर होने के बाद कई लोग रिश्तों की पवित्रता और उनकी गंभीरता को समझ नहीं पाते। उन्हें लगता है कि जब वे आर्थिक रूप से सक्षम हैं तो उन्हें किसी के सहारे या साथ की आवश्यकता नहीं है।

जबकि सच्चाई यह है कि पैसा इंसान की जरूरतें पूरी कर सकता है, लेकिन रिश्तों की जगह कभी नहीं ले सकता। हर रिश्ता अपने आप में महत्वपूर्ण होता है और जीवन को संतुलन व भावनात्मक सहारा देता है।

यदि लोग रिश्तों की कमियां ढूंढने के बजाय उनकी अच्छाइयों को स्वीकार कर साथ निभाने की भावना से जीना शुरू करें, तो समाज में रिश्तों के टूटने के बढ़ते आंकड़ों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

यह विचार सामाजिक कार्यकर्ता एवं प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश सचिव श्याम कुमार गुप्ता ने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि अपने सामाजिक कार्यों के दौरान समझ और संवाद के माध्यम से कई परिवारों को टूटने से बचाने का प्रयास किया गया है।

समाज में मजबूत रिश्ते ही परिवार और सामाजिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। इसलिए हर व्यक्ति को रिश्तों की अहमियत समझते हुए उन्हें निभाने का प्रयास करना चाहिए।

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