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दूसरों पर उंगली उठाने से पहले आत्मचिंतन ज़रूरी : श्याम गुप्ता

रायपुर
आज के सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में दोषारोपण की बढ़ती प्रवृत्ति पर सामाजिक विचारक श्याम गुप्ता ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि “यहाँ कोई भी पूरी तरह बेदाग नहीं है, हर व्यक्ति में कहीं-न-कहीं कोई न कोई कमी अवश्य होती है।” उन्होंने कहा कि समाज में सबसे बड़ा दाग उसी व्यक्ति पर लगता है, जो स्वयं को शुद्ध मानकर दूसरों पर दाग लगाने का कार्य करता है।

श्याम गुप्ता ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि बेदाग होने का दावा लगभग हर कोई करता है, लेकिन सच्चाई यह है कि दोष हर इंसान के भीतर मौजूद है। उन्होंने कहा कि दूसरों को दागी साबित करने की मानसिकता ही मनुष्य के चरित्र का सबसे बड़ा दोष बन जाती है।

उन्होंने यह भी कहा कि मनुष्य का वास्तविक दोष उसके दाग से नहीं, बल्कि दूसरों पर दोष थोपने की प्रवृत्ति से उजागर होता है। “जो व्यक्ति स्वयं को पूर्णतः शुद्ध समझता है, वही अक्सर समाज में सबसे बड़ा दागी सिद्ध होता है,” यह कथन आज के सामाजिक व्यवहार पर सटीक टिप्पणी है।

श्याम गुप्ता के अनुसार यह समय आत्ममंथन का है, न कि आरोप-प्रत्यारोप का। यदि प्रत्येक व्यक्ति स्वयं की कमियों को स्वीकार कर सुधार की दिशा में आगे बढ़े, तो समाज में वैमनस्य, द्वेष और असहिष्णुता स्वतः कम हो सकती है। उनका यह विचार समाज को नैतिकता, सहिष्णुता और आत्मचिंतन की ओर प्रेरित करता है।

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