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गौमाता की दुर्दशा पर उठे सवाल, शासन-प्रशासन पर जिम्मेदारी तय करने की मांग— श्याम गुप्ता

रायगढ़। भारतभूमि को सदियों से गौमाता का देश कहा जाता है, जहाँ गाय को न केवल धर्म और आस्था से जोड़ा गया है बल्कि उसे माँ का दर्जा दिया गया है। बावजूद इसके आज सच्चाई यह है कि हजारों गौमाता सड़कों पर तड़प-तड़प कर अपनी जान गंवा रही हैं। आए दिन एक्सीडेंट की खबरें आती हैं, लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से इस समस्या पर गंभीरता से ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे। समाजसेवी रेंशी श्याम गुप्ता ने इसे हिंदू संस्कृति और सनातन परंपरा पर सीधा हमला बताया है।

उन्होंने कहा कि “रोड पर गौमाता के दुश्मन हजारों हैं। वाहन दुर्घटनाओं में हर रोज उनकी मौत हो रही है। आखिर इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? शासन-प्रशासन क्यों चुप है? अगर सरकारें सच में हिंदुत्व और भारतीय संस्कृति की बात करती हैं तो सबसे पहले गौमाता की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।”

गुप्ता ने स्पष्ट कहा कि प्रकृति के हम मालिक नहीं, बल्कि केवल उसके हिस्से हैं। हमें उसका रक्षक बनना चाहिए, अत्याचार नहीं करना चाहिए। यदि हम वास्तव में भारतीय संस्कृति के रक्षक हैं तो हमें तुरंत गायों के संरक्षण की दिशा में ठोस नीति और कार्रवाई करनी होगी।

सरकारें बदलीं लेकिन हालात जस के तस

उन्होंने यह भी कहा कि जनता ने हिंदुत्व और संस्कृति के नाम पर बार-बार सरकारें बदलीं। लोगों को उम्मीद थी कि नई सरकारें आएंगी तो कोई चमत्कार होगा और बदलाव दिखाई देगा। लेकिन आज भी वही हालात हैं। सड़कों पर बेसहारा गौमाता भटक रही हैं, भूख से तड़प रही हैं और एक्सीडेंट में अपनी जान गंवा रही हैं।

“सरकारें बदलने से चमत्कार तभी होगा जब नीतियों में बदलाव हो। केवल भाषण और वादों से नहीं, बल्कि जमीन पर काम करने से गौमाता की रक्षा हो पाएगी।” – गुप्ता ने कहा।

समाज की भी जिम्मेदारी

उन्होंने समाज को भी कटघरे में खड़ा किया। “गौमाता केवल सरकार की नहीं, हम सबकी जिम्मेदारी है। यदि हर व्यक्ति थोड़ी सी भी जिम्मेदारी ले, तो न केवल उनकी जान बचेगी बल्कि भारत की संस्कृति भी सुरक्षित रहेगी।”

गुप्ता ने सुझाव दिया कि हर नगर और गांव में गौशालाओं का निर्माण, सड़क किनारे चराई क्षेत्र की व्यवस्था और प्रशासन की ओर से दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने जरूरी हैं।

निष्कर्ष

भारत में गाय केवल पशु नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और जीवन का प्रतीक है। ऐसे में अगर हजारों की संख्या में गौमाता सड़कों पर मर रही हैं तो यह पूरे समाज और शासन के लिए शर्म की बात है। जब तक सरकार और समाज दोनों मिलकर इसके समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाते, तब तक केवल नारे और वादों से कुछ नहीं बदलेगा।

गुप्ता ने अंत में कहा – “प्रकृति हमें जीवन देती है, हम उसका मालिक नहीं हैं। हमें संरक्षण करना होगा, अत्याचार बंद करना होगा और सबसे पहले गौमाता की रक्षा करनी होगी। यही सच्चा हिंदुत्व है।”

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