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“पूरा प्रदेश जमा कर रहा चावल… और ‘एक’ मिल जमा कर रही बहाने! धान पूरा ग़ायब, संरक्षण पूरा कायम…”

छत्तीसगढ़ / खरीफ विपणन वर्ष 2024–25 में चावल जमा करने की अंतिम तिथि 30 नवंबर 2025 तय थी, जिसे प्रदेश सरकार ने बढ़ाकर अब 30 अप्रैल तक कर दिया है।
इस बढ़ाई गई समय–सीमा का असर भी दिखा—प्रदेश के अधिकांश राइस मिलों ने अब तक करीब 70% चावल जमा कर दिया है।
लेकिन इसके बावजूद पूरे प्रदेश में एक राइस मिल ऐसी है जो नियमों को अपनी जेब में रखकर चल रही है।
इस ‘विशेष’ मिल ने अब तक एक दाना चावल जमा नहीं किया है।
चौंकाने वाली बात यह है कि चावल तो जमा नहीं हुआ,
लेकिन शासन से पूरा धान आराम से उठाया जा चुका है।
और इस पूरे खेल को—सूत्रों के अनुसार—
अधिकारियों का पूरा संरक्षण प्राप्त है।
जब संबंधित अधिकारियों से सवाल पूछा जाता है,
तो वही पुराना सरकारी मंत्र सुनने को मिलता है:
“हमें देखना पड़ेगा…”
मानो वर्षों से कुछ देखा ही नहीं हो।
प्रदेशभर में चर्चा तेज़ है कि यह राइस मिल आखिर किसके संरक्षण और किसकी ताकत पर खुलेआम नियमों की धज्जियाँ उड़ा रही है।
लेकिन अब इंतज़ार ज़्यादा लंबा नहीं।
नाम का खुलासा जल्द—सभी तथ्य और खेल के साथ।
बने रहिए —
राजू सोनी
लाल टोपी पंचायत नियोजन, राजनांदगांव

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