एक साल की उपेक्षा के बाद आधा-अधूरा राशि: सरपंचों के सवालों के घेरे में छत्तीसगढ़ सरकार

छत्तीसगढ़ प्रदेश की ग्राम पंचायतों को बीते एक वर्ष तक वित्तीय राशि नहीं दिए जाने के बाद अब सरकार द्वारा आधा-अधूरा पैसा जारी करना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। पंचायत प्रतिनिधियों, विशेषकर सरपंचों का कहना है कि यह कदम न तो विकास के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाता है और न ही ग्रामीण समस्याओं के समाधान की मंशा को।
एक वर्ष से पंचायतों के खाते खाली पड़े थे, जिससे निर्माण कार्य, साफ-सफाई, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, नाली और अन्य बुनियादी जरूरतों से जुड़े कार्य पूरी तरह ठप हो गए। सरपंचों का आरोप है कि बार-बार ज्ञापन, बैठक और मांग के बावजूद सरकार ने पंचायतों की सुध नहीं ली। अब जब दबाव बढ़ा तो आधी राशि देकर सरकार अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रही है।
सरपंचों का कहना है कि अधूरी राशि से न तो पुराने लंबित कार्य पूरे हो सकते हैं और न ही नए विकास कार्य शुरू किए जा सकते हैं। इससे पंचायत प्रतिनिधियों की साख जनता के बीच कमजोर हो रही है और ग्रामीणों में असंतोष बढ़ रहा है।
प्रश्न यह है कि क्या सरकार पंचायतों को केवल औपचारिक इकाई मानकर चल रही है, या फिर ग्रामीण विकास को सच में प्राथमिकता देना चाहती है। यदि सरकार वास्तव में विकास के प्रति गंभीर है तो उसे तत्काल पूरी लंबित राशि जारी कर पंचायतों को मजबूत करना होगा, अन्यथा इसका सीधा असर जमीनी स्तर पर देखने को मिलेगा।