“जहाँ जनहानि नहीं रुकती, वहाँ राष्ट्रपति शासन जरूरी” — राधेश्याम शर्मा का शासन-प्रशासन पर तीखा प्रहार

छत्तीसगढ़ में उद्योगों के आगे कठपुतली बना शासन, जल-जंगल-ज़मीन तबाह : राधेश्याम शर्मा

रायपुर | छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही जनहानि, औद्योगिक हादसों और सड़क दुर्घटनाओं को लेकर जनआक्रोश तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में सामाजिक चिंतक एवं जनहित के मुखर स्वर सामाजिक कार्यकर्त्ता राधेश्याम शर्मा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर शासन, प्रशासन और न्यायपालिका पर गंभीर सवाल खड़े किए।
राधेश्याम शर्मा ने साफ शब्दों में कहा कि “जहाँ लगातार जनहानि हो रही हो और उसे रोकने में शासन विफल हो, वहाँ राष्ट्रपति शासन लागू होना चाहिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में उद्योगों के दबाव में शासन-प्रशासन पूरी तरह कठपुतली बन चुका है, जिसके कारण जल, जंगल और जमीन का अंधाधुंध विनाश हो रहा है।
उन्होंने कहा कि औद्योगिक दुर्घटनाओं और सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन एक्सीडेंट से जुड़े जिम्मेदार विभाग पूरी तरह मौन हैं। आम जनता यदि शिकायत करना भी चाहे तो सवाल उठता है — कहाँ करें? किससे करें?
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राधेश्याम शर्मा ने बेबाकी से अपनी पीड़ा रखते हुए कहा कि यह सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि मानव जीवन की कीमत का सवाल है। उन्होंने मीडिया को अपना “गुरु” बताते हुए कहा कि आगे उनका अगला कदम क्या होगा, यह मीडिया तय करेगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब गेंद शासन-प्रशासन के पाले में है और आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि क्या सरकार वास्तव में जनता के हित में कोई ठोस निर्णय लेती है या फिर चुप्पी ही जवाब बनी रहेगी।
