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सहारा निवेशकों के हक की लड़ाई फिर हुई तेज, आमरण अनशन पर बैठेंगे नरेश कंकरवाल

सीज बैंक खाते खुलवाने के आरोपों पर कार्रवाई की मांग, ओमप्रकाश शर्मा समेत जिम्मेदारों के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे निवेशक

रायगढ़। सहारा इंडिया में लाखों निवेशकों की गाढ़ी कमाई वर्षों से फंसी होने से नाराज निवेशकों का आंदोलन एक बार फिर उग्र होने जा रहा है। सहारा निवेशकों के हितों के लिए लगातार संघर्ष कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता नरेश कंकरवाल ने घोषणा की है कि वे निवेशकों की जमा राशि वापस दिलाने तथा दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर पंचसूत्रीय मांगों के साथ पुनः आमरण अनशन पर बैठेंगे।

नरेश कंकरवाल ने कहा कि यह आंदोलन केवल धन वापसी का मुद्दा नहीं, बल्कि उन लाखों परिवारों के सम्मान और न्याय की लड़ाई है, जिनकी जीवनभर की बचत सहारा में फंसी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि रायगढ़ में सहारा के मुख्य जिम्मेदार अधिकारियों, जिनमें प्रमुख नाम ओमप्रकाश शर्मा का बताया जा रहा है, के सीज बैंक खातों को कथित रूप से सिटी कोतवाली थाना प्रभारी के सहयोग से खुलवाया गया, जिसकी निष्पक्ष जांच कर संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

पंचसूत्रीय मांगें इस प्रकार हैं:

  1. सीज बैंक खातों को खुलवाने में शामिल सभी जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।
  2. सभी आरोपियों की संपत्तियों की कुर्की और जब्ती की कार्रवाई की जाए।
  3. सहारा अधिकारी ओमप्रकाश शर्मा की जिन संपत्तियों को कुर्क किया गया है, उनसे प्राप्त होने वाला किराया अंतिम न्यायिक निर्णय आने तक कलेक्टर मद में जमा कराया जाए।
  4. ओमप्रकाश शर्मा एवं उनकी पत्नी द्वारा बैंक खातों से निकाली गई राशि की रिकवरी कर उसे कलेक्टर मद में जमा कराया जाए।
  5. थाना परिसर में जब्त अमृत श्रीवास एवं रजनीश तिवारी की कार को विधिवत कुर्की की कार्रवाई हेतु कलेक्टर कार्यालय भेजा जाए।

नरेश कंकरवाल ने कहा कि यदि लाखों निवेशकों की जमा पूंजी शीघ्र वापस नहीं कराई गई और दोषियों के विरुद्ध कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सहारा निवेशकों की यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन लाखों पीड़ित परिवारों की आवाज है, जो वर्षों से अपनी जमा-पूंजी वापस पाने के लिए न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

सहारा निवेशकों के मुद्दे को लेकर देशभर में समय-समय पर आंदोलन, न्यायिक हस्तक्षेप और प्रशासनिक पहल होती रही है, लेकिन आज भी बड़ी संख्या में निवेशक अपने पैसे की वापसी का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में अब एक बार फिर रायगढ़ से उठने वाली यह आवाज प्रशासन और जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

अब सभी की निगाहें प्रशासन और जांच एजेंसियों पर टिकी हैं। देखना लाजिमी होगा कि सहारा निवेशकों के हक की इस लड़ाई में दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई होती है या फिर एक बार फिर लाखों निवेशकों को केवल आश्वासनों का ही सहारा मिलता है।

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