“भारतीय संस्कृति की रक्षा पर जोर: सामाजिक कार्यकर्ता श्याम गुप्ता ने सर्वधर्म बुद्धिजीवियों से की एकजुट पहल की अपील”

“सनातन धर्म के मूल्यों से राष्ट्र की एकता मजबूत होगी: श्याम गुप्ता का राष्ट्रीय संदेश”

छत्तीसगढ़ / सामाजिक कार्यकर्ता श्याम गुप्ता ने भारतीय संस्कृति, इसकी मूल चेतना और सनातन परंपराओं के संरक्षण को लेकर देशवासियों से विशेष आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास विविधताओं से भरा है, लेकिन इसके मूल में वह सनातन जीवनदृष्टि है, जिसने हजारों वर्षों से मानवता, प्रकृति और समरसता को प्राथमिकता दी है। गुप्ता ने कहा कि “सनातन धर्म केवल एक धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि जीवन जीने की वह प्राचीन पद्धति है जिसमें प्रकृति, जीव-जंतुओं, पंचतत्व और मानव-मानव के बीच संतुलन स्थापित करने का संदेश दिया गया है।”
श्याम गुप्ता ने देश के सर्व धर्मों के बुद्धिजीवी, विद्वान और सामाजिक रूप से प्रभावी लोगों से अपील की कि वे भारतीय संस्कृति की मूल भावना—अध्यात्म, सद्भाव और सहअस्तित्व—की रक्षा के लिए आगे आएं। उनका कहना है कि इतिहास से लेकर आधुनिक समय तक भारत को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, जिनमें विदेशी शासन, सांस्कृतिक भ्रम और कुछ स्वार्थी तत्वों की गतिविधियाँ भी शामिल रहीं। उन्होंने जोर दिया कि “आज आवश्यकता है कि हम किसी भी प्रकार के भ्रम या विभाजन से दूर रहकर राष्ट्र की अखंडता और सामाजिक एकता को सर्वोपरि रखें।”
गुप्ता के अनुसार, यदि भारत अपने सांस्कृतिक मूल्यों—विशेषकर सत्य, करुणा, सेवा, कर्तव्य और प्रकृति संरक्षण—को मजबूत करता है, तो देश स्वतः ही अधिक सशक्त, आत्मनिर्भर और विश्व मार्गदर्शक बनेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय संस्कृति की रक्षा किसी एक धर्म का विषय नहीं, बल्कि भारत की आत्मा को सुरक्षित रखने का राष्ट्रीय कर्तव्य है। उनके मुताबिक, “जब सभी समुदाय, बुद्धिजीवी और नागरिक एक स्वर में संस्कृति और सद्भाव की रक्षा का संकल्प लेंगे, तभी भारत की अखंडता और सामाजिक सौहार्द और अधिक मजबूत होगा।”
