संविधान से चलता है भारत नफरत से नहीं, एकता ही राष्ट्र की असली ताकत… श्याम गुप्ता


छत्तीसगढ़ / यह कहना पूरी तरह गलत है कि भारत में डर का माहौल है। भारत एक संप्रभु, लोकतांत्रिक देश है, जो अपने संविधान के मूल सिद्धांतों पर चलता है। यहाँ प्रत्येक नागरिक को विचार, अभिव्यक्ति, धर्म और जीवन की स्वतंत्रता प्राप्त है। समस्या स्वतंत्रता में नहीं, बल्कि उस पाखंड और फर्जी, गंदी राजनीति में है, जो आज समाज में एक फैशन का रूप लेती जा रही है। दुर्भाग्यवश यह प्रवृत्ति किसी एक धर्म, पंथ, जाति या संप्रदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि लगभग हर वर्ग में किसी न किसी रूप में देखने को मिलती है।
एक-दूसरे के अपमान, वैचारिक असहिष्णुता और नफरत की राजनीति ने देश को सबसे अधिक नुकसान पहुँचाया है। इतिहास गवाह है कि आपसी फूट और विघटन के कारण ही भारत को मुगल और अंग्रेजी शासन के दौरान भारी सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक क्षति उठानी पड़ी। इसी विभाजन का दुष्परिणाम रहा कि देश टूटा, समाज बिखरा और धर्मांतरण जैसी पीड़ादायक घटनाएँ सामने आईं।
सच्चाई यह है कि तोड़ना आसान होता है, लेकिन जोड़ना बेहद कठिन। आज समाज में जोड़ने के प्रयास कम और तोड़ने की कोशिशें अधिक दिखाई देती हैं। आवश्यकता है कि सर्व समाज मिलकर संविधान की मूल भावना—एकता, समानता और भाईचारे—को मजबूत करे। नफरत नहीं, संवाद; अपमान नहीं, सम्मान—यही भारत को सशक्त, समृद्ध और अखंड बना सकता है।
— यह कथन देश के सामाजिक कार्यकर्ता, प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश संरक्षक एवं नागरिक सुरक्षा सेवा संगठन के संरक्षक श्याम गुप्ता के हैं।
