कड़वा सच: बच्चों के भविष्य की चिंता में डिप्रेशन मानसिक तनाव का शिकार हो रहे 98% माता-पिता…. श्याम गुप्ता सामाजिक कार्यकर्त्ता

प्रदूषित सामाजिक माहौल और जिम्मेदारों की नाकामी ने युवाओं की महाशक्ति को बना दिया मानसिक रूप से विकलांग
छत्तीसगढ़ / आज का यह कड़वा सच समाज के हर संवेदनशील व्यक्ति को झकझोरने वाला है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश संरक्षक श्याम गुप्ता ने युवाओं और परिवारों की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज करीब 98 प्रतिशत माता-पिता स्वयं के लिए नहीं, बल्कि अपने बच्चों के भविष्य को लेकर डिप्रेशन और मानसिक तनाव में जी रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह मान लेना पर्याप्त नहीं है कि घर के संस्कार अच्छे हैं। असली चुनौती उस बाहरी प्रदूषित सामाजिक माहौल से है, जो बच्चों और युवाओं को चारों ओर से घेर रहा है। नशा,आन लाईन सट्टा जुआ अपराध, भटकाव, मोबाइल और सोशल मीडिया की लत, बेरोजगारी और नैतिक मूल्यों का पतन—ये सभी मिलकर युवाओं की सोच, दिशा और ऊर्जा को कमजोर कर रहे हैं।
श्याम गुप्ता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस स्थिति के लिए केवल परिवार जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि वे लोग विभागीय संस्थाएं भी जिम्मेदार हैं जिनके कंधों पर समाज, शिक्षा, रोजगार और युवाओं के मार्गदर्शन की जिम्मेदारी है जिम्मेदारों की लगातार नाकामियों के कारण आज देश की सबसे बड़ी ताकत—युवा शक्ति—मानसिक रूप से कुंठित और दिशाहीन होती जा रही है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट केवल परिवारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समाज और राष्ट्र की नींव को कमजोर कर देगा। जरूरत है कि सरकार, समाज, शिक्षा संस्थान और अभिभावक सामूहिक जिम्मेदारी निभाएं और युवाओं को सुरक्षित, सकारात्मक और प्रेरणादायक सँस्कारित वातावरण प्रदान करें।
