हिंदू सम्मेलन के साथ ‘हिंदू सहयोग सम्मेलन’ जरूरी, तभी होगा समाज और अधिक संगठित — श्याम गुप्ता

सनातन धर्म की रक्षा के लिए मूल कारणों पर प्रहार जरूरी, जाति भेदभाव से ऊपर उठना होगा — श्याम गुप्ता

छत्तीसगढ़ सामाजिक कार्यकर्ता श्याम गुप्ता ने कहा है कि केवल हिंदू सम्मेलन आयोजित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके साथ-साथ हिंदू सहयोग सम्मेलन भी आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि समाज के सभी वर्गों के बीच आपसी सहयोग, संवेदनशीलता और संगठनात्मक मजबूती विकसित हो सके। उन्होंने कहा कि इससे हिंदू समाज और अधिक संगठित, जागरूक और सशक्त बनेगा।
श्याम गुप्ता ने सनातन धर्म और संस्कृति को बचाने के प्रयासों को सराहनीय बताते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि हम समस्या की जड़ों तक जाएं। उन्होंने कहा, “मैं स्वयं सनातन हिंदू धर्म से हूं और मुझे गहरी पीड़ा है कि इतिहास से लेकर वर्तमान तक लालच, भय और फर्जी सेवा कार्यों के बहाने हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। हम बहुसंख्यक हैं, इसलिए इसके वास्तविक आंकड़े सामने नहीं आ पाते, लेकिन यह एक गंभीर सच्चाई है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी अलगाववादी शक्तियों द्वारा सुनियोजित षड्यंत्र के तहत सनातन धर्म को कमजोर करने का प्रयास लंबे समय से जारी है और भारत में इसे समाप्त करने की सोच के साथ मिशनरी गतिविधियां संचालित हो रही हैं। श्याम गुप्ता ने कहा कि सक्षम और संपन्न सनातन धर्म परिवारों को आगे आकर कमजोर वर्ग के सनातनियों को “गोद लेना” होगा, ताकि उन्हें शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मिल सके।
उन्होंने समाज के भीतर मौजूद जाति भेदभाव को भी बड़ी बाधा बताया। गुप्ता ने कहा कि जब तक सनातन समाज जातिगत संकीर्णता से बाहर नहीं निकलेगा, तब तक धर्म और संस्कृति की रक्षा संभव नहीं है। उन्होंने सभी सनातनियों से आह्वान किया कि वे एक-दूसरे के साथ खड़े हों, सहयोग की भावना विकसित करें और संगठित होकर सनातन धर्म की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाएं।
