सम्पूर्ण प्रकृति का सम्मान ही सनातन धर्म की आत्मा : श्याम गुप्ता

दिव्य शक्तियों की देन है सनातन संस्कृति, मानव निर्मित नहीं : सामाजिक कार्यकर्ता श्याम गुप्ता

छत्तीसगढ़ सनातन धर्म केवल एक पंथ या आस्था नहीं, बल्कि सम्पूर्ण प्रकृति के सम्मान और समावेश की महान संस्कृति है। यह विचार सामाजिक कार्यकर्ता प्रेस रिपोर्टर क्लब प्रदेश संरक्षक व नागरिक सुरक्षा सेवा संगठन के संस्थापक रेंशी श्याम गुप्ता ने व्यक्त करते हुए कहा कि सनातन धर्म को किसी एक मानव ने नहीं, बल्कि दिव्य शक्तियों और प्रकृति के नियमों ने गढ़ा है। यही कारण है कि इसमें जल, जंगल, जमीन, पशु-पक्षी, वृक्ष और समस्त जीव-जगत को समान आदर दिया गया है।
श्याम गुप्ता ने कहा कि सनातन धर्म की संस्कृति त्याग, सहअस्तित्व और समर्पण पर आधारित है। जो व्यक्ति प्रकृति, जीवन और सृष्टि के संतुलन को समझने की क्षमता नहीं रखता, वही सनातन धर्म और उसकी संस्कृति को स्वीकार नहीं कर पाता। सनातन परंपरा हमें सिखाती है कि मानव स्वयं को प्रकृति से श्रेष्ठ नहीं, बल्कि उसका अभिन्न अंग माने।
उन्होंने आगे कहा कि आज के भौतिकवादी युग में सनातन मूल्यों को कमजोर करने के प्रयास हो रहे हैं, जबकि यही मूल्य मानव समाज को विनाश से बचाने की शक्ति रखते हैं। आवश्यकता इस बात की है कि समाज सनातन संस्कृति के मूल तत्वों—प्रकृति सम्मान, सहिष्णुता और समावेश—को समझे और अपने जीवन में उतारे।
श्याम गुप्ता ने युवाओं से आह्वान किया कि वे सनातन धर्म को रूढ़ियों के बजाय उसके वैज्ञानिक, आध्यात्मिक और प्रकृति-आधारित स्वरूप में समझें और विश्व कल्याण के इस मार्ग को आगे बढ़ाएं।
