पेपर लीक युवाओं के सपनों पर आघात, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था समय की सबसे बड़ी जरूरत — पूर्व डिप्टी डायरेक्टर, नेहरू युवा केंद्र, भारत सरकार (बलबीर शर्मा)

जवाबदेही और सख्त सुधार से ही मजबूत होगी परीक्षा प्रणाली, युवाओं का विश्वास बहाल करना प्राथमिकता — बलबीर शर्मा

रायपुर। पेपर लीक जैसी घटनाओं को लेकर पूर्व डिप्टी डायरेक्टर, नेहरू युवा केंद्र, भारत सरकार बलबीर शर्मा ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि परीक्षा में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी लाखों युवाओं की कड़ी मेहनत, उनके सपनों और भविष्य को सीधे प्रभावित करती है। ऐसे मामलों से अभ्यर्थियों के मनोबल को गहरी ठेस पहुँचती है और युवाओं का आक्रोश स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि इस गंभीर समस्या को देखते हुए सरकार द्वारा परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने, अनियमितताओं पर अंकुश लगाने तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। कड़े कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन और दोषियों पर सख्त कार्रवाई ही युवाओं के विश्वास को मजबूत करने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
बलबीर शर्मा ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका को भी निष्पक्ष दृष्टिकोण से देखने की बात कही। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान अपनी ईमानदारी, संवेदनशीलता और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते रहे हैं। उनके अनुसार, जंतर-मंतर पर हुए विरोध तथा परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी प्रशासनिक चुनौतियों के बीच शिक्षा मंत्री के पद से त्यागपत्र देने का निर्णय उनके उच्च राजनीतिक और नैतिक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के हितों को प्राथमिकता देना किसी भी व्यवस्था की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए। पद से अधिक जनभावनाओं और नैतिक जवाबदेही को महत्व देना लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण संदेश देता है।
उन्होंने यह भी कहा कि संशोधन और सुधार एक निरंतर प्रक्रिया है। आज आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, प्रशासन, शिक्षण संस्थान और समाज मिलकर ऐसी मजबूत, निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली का निर्माण करें, जिसमें मेहनती और प्रतिभावान युवाओं के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय न हो।
उन्होंने अंत में कहा कि देश के युवाओं का विश्वास परीक्षा प्रणाली और लोकतांत्रिक व्यवस्था में पुनः स्थापित करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है, ताकि प्रत्येक अभ्यर्थी को उसकी योग्यता के आधार पर आगे बढ़ने का समान अवसर मिल सके।

