“लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, हिंसा और अराजकता का नहीं” — श्याम गुप्ता

“शिक्षा के साथ संस्कार भी आवश्यक, तभी बचेगा राष्ट्र का भविष्य” — श्याम गुप्ता

“शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, संस्कार, संवैधानिक मूल्यों और जिम्मेदार नागरिकों का निर्माण करना है। लोकतंत्र की रक्षा शांतिपूर्ण संवाद, कानून के सम्मान और राष्ट्रीय एकता से होती है, न कि हिंसा और अराजकता से।”
रायगढ़। प्रेस रिपोर्टर क्लब छत्तीसगढ़ के प्रदेश सचिव एवं समाजसेवी श्याम गुप्ता ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के नाम पर हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान सामने आए हिंसक एवं अव्यवस्थित घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र प्रत्येक नागरिक को अपनी बात शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से रखने, धरना-प्रदर्शन करने तथा असहमति व्यक्त करने का अधिकार देता है, लेकिन कानून हाथ में लेना, हिंसा करना, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना अथवा समाज में अशांति फैलाना किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं माना जा सकता।
श्याम गुप्ता ने कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्य, अनुशासन, संवैधानिक मर्यादाओं के प्रति सम्मान और राष्ट्रहित की भावना का समावेश भी आवश्यक है। उनका मानना है कि शिक्षा में संस्कारों और चरित्र निर्माण पर विशेष बल दिए बिना युवाओं को भटकाने वाली प्रवृत्तियों, नशे जैसी सामाजिक बुराइयों और हिंसात्मक सोच पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध और असहमति व्यक्त करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, किंतु हिंसा, अराजकता फैलाना या किसी भी प्रकार की गैरकानूनी गतिविधि करना अधिकार नहीं है। यदि कोई व्यक्ति या संगठन कानून का उल्लंघन करता है, तो उसके विरुद्ध निष्पक्ष एवं विधिसम्मत कार्रवाई होनी चाहिए।
श्याम गुप्ता ने देश के युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा को केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम न मानें, बल्कि अपने चरित्र, संस्कार, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक उत्तरदायित्व के विकास का आधार बनाएं। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य तभी सुरक्षित और मजबूत होगा, जब युवा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए संविधान, कानून और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का सम्मान करेंगे।
— श्याम गुप्ता
प्रदेश सचिव, प्रेस रिपोर्टर क्लब, छत्तीसगढ़
समाजसेवी
