“कैसे एक होगा मेरा सर्व समाज?”—सामाजिक बिखराव पर श्याम गुप्ता ने जताई चिंता


“मानव-मानव एक समान” का संदेश देने वाले संतों की धरती पर बढ़ती सामाजिक दूरी चिंताजनक—श्याम गुप्ता

रायगढ़। देश में सर्व समाज की एकता को लेकर लगातार चर्चा होती है, लेकिन धरातल पर सामाजिक व्यवस्थाओं और विभिन्न जाति-समाज के बीच बढ़ती दूरियां चिंता का विषय बनती जा रही हैं। इसी मुद्दे को लेकर प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश सचिव श्याम गुप्ता ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एक ओर हम सर्व समाज को एकजुट करने की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर समाज को जोड़ने वाली व्यवस्थाएं और आपसी समन्वय दिन-प्रतिदिन कमजोर होते दिखाई दे रहे हैं।
श्याम गुप्ता ने कहा कि भारत की महान संत परंपरा ने सदियों से “मानव-मानव एक समान” का संदेश दिया है। अलग-अलग पंथ, विचारधारा और परंपराओं से जुड़े अनेक साधु-संतों ने समाज को भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता और भाईचारे के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। लेकिन दुर्भाग्य से समय-समय पर संतों और धार्मिक विचारधाराओं के नाम पर भी सामाजिक विभाजन की राजनीति देखने को मिली।
उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में “फूट डालो और राज करो” जैसी नीतियों ने समाज को विभाजित करने का काम किया, जिसका खामियाजा कई पीढ़ियों को भुगतना पड़ा। आज भी यदि किसी भी दिशा से समाज में अलगाव, अविश्वास और आपसी टकराव बढ़ाने के प्रयास होते हैं, तो उन्हें समझदारी और सामाजिक एकता के माध्यम से विफल करना आवश्यक है।
श्याम गुप्ता ने कहा कि सर्व समाज की एकता केवल नारों और मंचों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका प्रभाव धरातल पर दिखाई देना चाहिए। जाति, पंथ, भाषा और क्षेत्र से ऊपर उठकर एक-दूसरे के सम्मान, सहयोग और संवाद की संस्कृति को मजबूत करना होगा।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की भी जिम्मेदारी है कि वे समाज को जोड़ने वाली राजनीति करें, न कि किसी भी प्रकार के विभाजन को बढ़ावा दें। भारत की शक्ति उसकी विविधता में निहित है और इस विविधता को सामाजिक एकता में बदलना ही देश की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।
श्याम गुप्ता ने देशवासियों से आह्वान करते हुए कहा कि यदि हम वास्तव में “सर्व समाज एक” देखना चाहते हैं, तो इसकी शुरुआत हमें अपने घर, गांव, मोहल्ले और समाज से करनी होगी। आपसी मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद को स्थायी दुश्मनी में बदलने से बचना होगा। सामाजिक एकता ही मजबूत भारत की नींव है।
उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता को कमजोर करने वाली किसी भी प्रकार की विभाजनकारी सोच का मुकाबला संविधानसम्मत लोकतांत्रिक मूल्यों, आपसी भाईचारे और सामाजिक सद्भाव के माध्यम से किया जाना चाहिए।


