“किताबी ज्ञान के अहंकार में अपनी जड़ों और आस्था का अपमान न करें” : श्याम गुप्ता

“जिस समाज की धार्मिक-सांस्कृतिक जड़ें मजबूत होती हैं, उसकी पहचान और विरासत भी मजबूत रहती है” : श्याम गुप्ता

रायगढ़। प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश सचिव श्याम गुप्ता ने सनातन धर्म की धार्मिक एवं सांस्कृतिक मान्यताओं को लेकर कहा कि आज कई बार हमारे देवी-देवताओं और धार्मिक परंपराओं को लेकर सवाल उठाए जाते हैं तथा उन्हें काल्पनिक कहकर हमारी आस्था और परंपराओं को कमतर आंकने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक मान्यता पर असहमति हो सकती है, लेकिन अपनी आस्था और पूर्वजों की परंपराओं का अपमान करना उचित नहीं है।
श्याम गुप्ता ने कहा कि किताबी ज्ञान और आधुनिक शिक्षा मनुष्य को आगे बढ़ने का अवसर देती है, लेकिन शिक्षा के साथ विनम्रता और संस्कार भी जरूरी हैं। आत्मनिर्भर और शिक्षित होने का अर्थ यह कतई नहीं कि व्यक्ति अपने पूर्वजों की धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मान्यताओं को ही गलत समझने लगे।
उन्होंने कहा कि हमारी पीढ़ियों ने जिन धार्मिक परंपराओं, पर्व-त्योहारों, संस्कारों और सामाजिक मूल्यों को वर्षों से संजोकर रखा है, वे हमारी सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि आधुनिक ज्ञान को अपनाएं, प्रश्न पूछें, तर्क करें, लेकिन अपनी जड़ों, संस्कृति और पूर्वजों के प्रति सम्मान बनाए रखें।
श्याम गुप्ता ने कहा कि किसी भी समाज की मजबूती केवल उसकी आर्थिक या शैक्षणिक प्रगति से नहीं होती, बल्कि उसकी संस्कृति, संस्कार, सामाजिक एकता और अपनी जड़ों से जुड़ाव भी उसकी ताकत होते हैं। अपनी विरासत को समझना और उसका सम्मान करना पिछड़ापन नहीं, बल्कि अपनी पहचान के प्रति जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को शिक्षा और विज्ञान के साथ अपनी संस्कृति का ज्ञान भी दिया जाना चाहिए, ताकि वे आधुनिकता के साथ अपनी पहचान को भी मजबूती से आगे बढ़ा सकें।
श्याम गुप्ता ने कहा— “ज्ञान हमें प्रश्न करना सिखाता है, संस्कार हमें सम्मान करना सिखाते हैं; दोनों का संतुलन ही सच्ची शिक्षा है।”
