शिक्षा के साथ संस्कार जरूरी, वरना ज्ञान का अहंकार रिश्तों को कर देता है कमजोर: श्याम गुप्ता

पूर्वजों के संस्कारों पर उंगली उठाने से पहले वर्तमान में टूटते रिश्तों के आंकड़ों पर नजर डालें: श्याम गुप्ता
रायगढ़। प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश सचिव श्याम गुप्ता ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और तेजी से बदलते सामाजिक रिश्तों को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि केवल शिक्षित होना ही पर्याप्त नहीं है, शिक्षा के साथ संस्कार और विनम्रता का होना भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने कहा, “आदम था तो शिक्षा नहीं थी, थोड़ा ज्ञान आया तो मानव बने, थोड़ा और ज्ञान आया तो इंसान बने और उससे भी ज्यादा शिक्षा-ज्ञान आया तो फिर अनपढ़ गंवार बन गए।” श्याम गुप्ता ने इस कथन के माध्यम से वर्तमान पीढ़ी में बढ़ते शिक्षा के अहंकार और पारिवारिक संस्कारों से दूरी पर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि आज कई लोग अपने माता-पिता और पूर्वजों द्वारा दिए गए सामाजिक एवं पारिवारिक संस्कारों को पुराना अथवा गलत समझने लगे हैं। लेकिन वर्तमान समय में विवाह के बाद रिश्तों के टूटने और परिवारों के बिखरने की बढ़ती घटनाएं समाज के सामने एक गंभीर सवाल खड़ा करती हैं। उन्होंने कहा कि यदि केवल आत्मनिर्भर और शिक्षित होना ही सुखी जीवन की गारंटी होता, तो रिश्तों में इतनी टूटन क्यों दिखाई देती?
श्याम गुप्ता ने कहा कि हमारे पूर्वज भले ही आज की तरह आधुनिक शिक्षा से ज्यादा शिक्षित नहीं थे, लेकिन वे बड़े परिवारों को प्रेम, त्याग, सम्मान, जिम्मेदारी और संस्कारों के साथ जोड़कर रखते थे। संयुक्त परिवारों में अनेक पीढ़ियां एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़ी रहती थीं। यह उनके सामाजिक संस्कारों और जीवन मूल्यों की मजबूती को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर बनना अच्छी बात है, लेकिन आत्मनिर्भरता को अहंकार में बदल देना रिश्तों के लिए घातक हो सकता है। अपनी सुविधाएं बढ़ाने के प्रयास में यदि व्यक्ति अपने ही माता-पिता, भाई-बहन और परिवार से दूर हो जाए, तो ऐसी सफलता पर आत्ममंथन की आवश्यकता है।
श्याम गुप्ता ने कहा कि वर्तमान समय में देश के थानों और न्यायालयों तक पहुंच रहे पारिवारिक विवादों तथा वैवाहिक संबंधों के टूटने की बड़ी संख्या समाज के लिए चिंतन का विषय है। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं के पीछे अनेक सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत कारण हो सकते हैं, लेकिन शिक्षा के साथ संस्कारों की कमी और बढ़ता अहंकार भी समाज को प्रभावित कर रहा है।
उन्होंने भावी युवा पीढ़ी से अपील करते हुए कहा कि अपने पूर्वजों के सामाजिक संस्कारों और जीवन मूल्यों पर जल्दबाजी में उंगली न उठाएं। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने सीमित साधनों में भी परिवार को प्रेम, सम्मान और संस्कार देकर बेहतर जीवन जीने का मार्ग दिखाया है। आधुनिक शिक्षा और आत्मनिर्भरता को अपनाते हुए यदि युवा पीढ़ी अपने संस्कारों को भी साथ लेकर चले, तो परिवार, समाज और राष्ट्र को अधिक मजबूत बनाया जा सकता है।
श्याम गुप्ता ने कहा— “शिक्षा जीवन को दिशा देती है, लेकिन संस्कार उस दिशा को सही रास्ता दिखाते हैं।”
