कार्यकर्ता बचाओ अभियान की जरूरत, क्योंकि कार्यकर्ता ही हर राजनीतिक दल की रीढ़: श्याम गुप्ता


सम्मान से दूर होता कार्यकर्ता तो राजनीति बन जाएगी ‘दुकान’, जनसेवा की जगह दिखेगा उद्योग जैसा सिस्टम

रायगढ़। प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश सचिव श्याम गुप्ता ने वर्तमान राजनीतिक माहौल पर अपनी बेबाक राय रखते हुए कहा कि मेरी बात किसी को कड़वी लगे तो दो निवाला गाली देकर खा लेना, लेकिन जो कड़वा सच है उसे स्वीकार करने का साहस भी रखना चाहिए। आज देश की हर राजनीतिक पार्टी और संगठन को ‘कार्यकर्ता बचाओ अभियान’ चलाने की जरूरत है।
श्याम गुप्ता ने कहा कि प्रत्येक राजनीतिक दल की असली ताकत उसके समर्पित कार्यकर्ता होते हैं। कार्यकर्ता ही वह रीढ़ हैं, जिनके परिश्रम, संघर्ष और संगठन के प्रति समर्पण के बल पर राजनीतिक दल मजबूत होते हैं और सरकारें बनती हैं। इन्हीं कार्यकर्ताओं की मेहनत से विधायक, मंत्री और अन्य जनप्रतिनिधियों को पद और प्रतिष्ठा हासिल होती है।
उन्होंने कहा कि सत्ता और पद मिलने के साथ कई बार पद-प्रतिष्ठा का अहंकार भी नेताओं के आसपास दिखाई देने लगता है। इसका सबसे बड़ा असर जमीनी कार्यकर्ताओं पर पड़ता है। कार्यकर्ता अपनी बात खुलकर कह नहीं पाते और जब उन्हें उचित सम्मान, संवाद और महत्व नहीं मिलता तो वे धीरे-धीरे संगठन से दूरी बनाने लगते हैं। इसका नुकसान अंततः उसी राजनीतिक दल को उठाना पड़ता है।
श्याम गुप्ता ने कहा कि केवल मंचों से कार्यकर्ता को पार्टी की रीढ़ बताने और बड़े-बड़े संवाद बोलने से काम नहीं चलेगा। कार्यकर्ता के सम्मान को व्यवहार में उतारना होगा। समर्पित और संघर्षशील कार्यकर्ताओं की बात सुनी जानी चाहिए तथा निर्णय प्रक्रिया में उन्हें उचित स्थान मिलना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि राजनीतिक दलों में कार्यकर्ताओं की उपेक्षा इसी तरह जारी रही और सम्मान की कमी के कारण समर्पित कार्यकर्ता रूठकर दूर होते गए तो वह दिन दूर नहीं जब राजनीति जनसेवा के बजाय ‘पद, प्रतिष्ठा और स्वार्थ की दुकान’ जैसी दिखाई देने लगेगी।
उन्होंने कहा कि राजनीति का उद्देश्य जनता की सेवा और समाज के हित में काम करना होना चाहिए, न कि केवल पद प्राप्त करना। यदि कार्यकर्ता केवल वेतन पाने वाले कर्मचारी की तरह और संगठन किसी उद्योग की तरह संचालित होने लगे, तो लोकतांत्रिक राजनीति की मूल भावना कमजोर होगी।
श्याम गुप्ता ने सभी राजनीतिक दलों के नेतृत्व से अपील करते हुए कहा कि समय रहते जमीनी कार्यकर्ताओं की भावनाओं को समझें, उनके साथ संवाद बढ़ाएं और उन्हें सम्मान दें। कार्यकर्ता बचेगा तो संगठन बचेगा, संगठन मजबूत रहेगा तो राजनीति में जनसेवा की भावना भी जीवित रहेगी।
