गौमाता की रक्षा सिर्फ आस्था नहीं, भारतीय संस्कृति और विरासत की जिम्मेदारी : श्याम कुमार गुप्ता



गौवंश संरक्षण को सामाजिक दायित्व बनाने की अपील, सड़क दुर्घटनाओं और गौवंश के प्रति क्रूरता पर जताई चिंता

रायगढ़। नागरिक स्वच्छता संगठन के संस्थापक एवं प्रेस क्लब के प्रदेश सचिव श्याम कुमार गुप्ता ने गौमाता के संरक्षण को भारतीय संस्कृति, संस्कार और विरासत की रक्षा से जोड़ते हुए समाज से गौवंश के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी निभाने की अपील की है।
श्याम कुमार गुप्ता ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने प्रकृति और जीव-जंतुओं के संरक्षण का जो महान संस्कार हमें दिया, उसमें गौमाता को माता का स्थान प्राप्त है। भारतीय संस्कृति में गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि हमारी परंपरा, कृषि व्यवस्था, ग्रामीण जीवन और करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ी हुई महत्वपूर्ण विरासत है।
उन्होंने कहा कि आज बड़ी संख्या में गौवंश सड़कों पर बेसहारा घूम रहा है और आए दिन सड़क दुर्घटनाओं में उनकी मौत हो रही है। वहीं गौवंश के प्रति क्रूरता और अवैध वध जैसी घटनाएं भी समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि गौ संरक्षण को केवल धार्मिक दृष्टिकोण से देखने के बजाय इसे भारतीय संस्कृति, संस्कार, पर्यावरण, मानवीय संवेदना और राष्ट्रीय विरासत के संरक्षण के रूप में भी समझना होगा।
गुप्ता ने कहा कि देशी गौवंश की विलुप्त होती नस्लों को बचाने के साथ ही सड़कों पर घूमने वाले पशुओं के लिए सुरक्षित आश्रय, चारा-पानी और उचित व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने समाज, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मिलकर इस दिशा में स्थायी पहल करने की अपील की।
उन्होंने कहा, “आइए हम सभी भारतीय संस्कृति के जिम्मेदार नागरिक के रूप में संकल्प लें कि गौमाता के प्रति सम्मान और संवेदना को अपने आचरण का हिस्सा बनाएंगे। जीवों के प्रति करुणा हमारी संस्कृति की पहचान है। गौवंश की रक्षा केवल किसी एक वर्ग या समुदाय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हमारी साझा सांस्कृतिक विरासत और मानवीय संवेदनाओं की रक्षा का दायित्व है।”
श्याम कुमार गुप्ता ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि गौमाता के संरक्षण के लिए केवल भावनात्मक बातें पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि हमें व्यवहारिक रूप से भी आगे आना होगा। गौवंश को सड़क पर बेसहारा छोड़ने के बजाय उनके संरक्षण और देखभाल की जिम्मेदारी निभानी होगी तथा दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे।
उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को ऐसी भारतीय संस्कृति सौंपना हमारा दायित्व है, जिसमें प्रकृति, पशु-पक्षियों और प्रत्येक जीव के प्रति सम्मान और करुणा बनी रहे।
जय हिंद! जय भारत! वंदे मातरम्! जय गौमाता!
