राजनीति के ‘बंटी-बबली’ बने नंदू लहरे दंपती? करोड़ों की सरकारी राशि और अधूरे विकास कार्यों पर गंभीर सवाल



जांच व बार-बार नोटिस के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से सरपंचों में आक्रोश, कलेक्टर से गुहार—न्याय नहीं मिला तो अनशन की चेतावनी


रायगढ़। जिले में ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों के लिए जारी करोड़ों रुपये की सरकारी राशि के कथित दुरुपयोग और कार्यों के अधूरे रहने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। शिकायतकर्ताओं ने नंदलाल (नंदू) लहरे और विजयन्ती लहरे दंपती पर गंभीर आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन से निष्पक्ष एवं प्रभावी कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, परिवार के सदस्य महाबीर के नाम से फर्म बनाकर विभिन्न ग्राम पंचायतों से जुड़े विकास कार्यों के लिए सरकारी राशि प्राप्त की गई, लेकिन राशि प्राप्त होने के बावजूद संबंधित कार्य निर्धारित रूप से पूर्ण नहीं किए गए।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इस मामले को लेकर पूर्व में भी जिला कलेक्टर एवं संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायतें की जा चुकी हैं। प्रशासनिक स्तर पर जांच और नोटिस की कार्रवाई होने के बावजूद कई ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों की स्थिति को लेकर सवाल कायम हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मामला छोटी राशि का नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये की सरकारी राशि से जुड़ा बताया जा रहा है, इसलिए इसकी व्यापक वित्तीय एवं तकनीकी जांच जरूरी है।
जांच और नोटिस के बाद भी क्यों नहीं पूरे हुए काम?
सरपंचों का कहना है कि सरकारी राशि किसी निर्धारित विकास कार्य के लिए जारी की जाती है। यदि संबंधित पक्ष द्वारा राशि प्राप्त कर ली गई है, तो उसके अनुरूप कार्य धरातल पर दिखाई देना चाहिए। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि राशि प्राप्त होने के बावजूद कई कार्य अब तक पूर्ण नहीं हुए हैं।
उनका कहना है कि भुगतान संबंधी दस्तावेज, फर्म के रिकॉर्ड, कार्यादेश, माप पुस्तिका, बिल-वाउचर तथा मौके पर हुए निर्माण कार्यों का मिलान कराया जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी राशि का वास्तविक उपयोग किस प्रकार किया गया और किन कार्यों में कितना काम हुआ।
शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित दंपती के राजनीतिक एवं संगठनात्मक स्तर पर प्रभावशाली लोगों से मधुर संबंध हैं और इसी कारण प्रशासनिक कार्रवाई प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, राजनीतिक संरक्षण के इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
बार-बार नोटिस के बाद भी सवाल कायम
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, जिला प्रशासन द्वारा पूर्व में कई बार नोटिस जारी किए जाने के बावजूद ग्राम पंचायतों से जुड़े कुछ कार्य पूरे नहीं होने का आरोप है। उनका कहना है कि यदि जांच में सरकारी राशि प्राप्त होने और उसके अनुरूप कार्य नहीं किए जाने की पुष्टि हो चुकी है, तो जिम्मेदारी तय कर सरकारी राशि की वसूली तथा नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
सरपंचों का कहना है कि सरकारी धन जनता के विकास के लिए होता है। विकास कार्यों के नाम पर राशि जारी होने के बाद यदि कार्य अधूरे रह जाते हैं तो इसका सीधा असर ग्रामीणों और पंचायतों के विकास पर पड़ता है। इसलिए मामले को केवल राजनीतिक विवाद न मानकर सार्वजनिक धन से जुड़ा गंभीर प्रशासनिक विषय मानते हुए कार्रवाई की जानी चाहिए।
कलेक्टर से गुहार, कार्रवाई नहीं तो अनशन
आक्रोशित सरपंचों ने जिला कलेक्टर से दोबारा गुहार लगाते हुए मामले की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराने तथा जांच में दोष सिद्ध होने पर सरकारी राशि की वसूली और नियमानुसार कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
सरपंचों का कहना है कि शिकायत, जांच और नोटिस की प्रक्रिया के बाद भी यदि संबंधित विकास कार्य पूरे नहीं होते हैं, तो अब प्रशासन को ठोस कदम उठाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी शिकायतों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन और अनशन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की सरकारी राशि से जुड़े इस मामले में प्रशासन अगला कदम क्या उठाता है? क्या जिम्मेदारों से सरकारी धन की वसूली होगी और अधूरे विकास कार्य पूरे कराए जाएंगे, या मामला फिर नोटिसों तक ही सीमित रह जाएगा? सरपंचों और ग्रामीणों की निगाहें अब जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

