संतों के संदेश को राजनीति और जाति-पंथ के विवाद से मुक्त रखना होगा : श्याम गुप्ता

संतों ने समाज को जोड़ने का संदेश दिया, आज उनके नाम पर ही विभाजन की राजनीति चिंता का विषय : श्याम गुप्ता

रायगढ़। प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश सचिव एवं नागरिक सुरक्षा सेवा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष-संस्थापक श्याम कुमार गुप्ता ने कहा कि यह एक कड़वा सत्य है कि अखंड भारत की संत परंपरा को किसी धर्म, पंथ या जाति की सीमाओं में बांधा नहीं जा सकता। हमारे संत समाज के मार्गदर्शक और मानवता के सच्चे दूत रहे हैं, जिन्होंने समाज में व्याप्त पाखंड, कुरीतियों, भेदभाव और सामाजिक बुराइयों को दूर करने का महान संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से आज हम संतों के विचारों को आत्मसात करने के बजाय केवल उनके नाम और संदेश का दिखावटी सम्मान कर रहे हैं। संतों और भगवान के नाम पर राजनीति करना तथा धर्म-पंथ और जाति के नाम पर समाज में अलगाव पैदा करना उनकी मूल शिक्षाओं के विपरीत है।
श्याम गुप्ता ने कहा कि संतों का संदेश था—मनुष्य-मनुष्य में समानता, भाईचारा और मानवता। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में भाई को भाई से दूर करने वाली राजनीति और सामाजिक विभाजन की प्रवृत्तियां चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास में ‘फूट डालो और राज करो’ जैसी नीतियों ने समाज को नुकसान पहुंचाया और आज भी यदि कोई ताकत लोगों को आपस में बांटकर अपना स्वार्थ साधती है, तो समाज को ऐसी प्रवृत्तियों के प्रति सजग रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संविधान देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार है, इसलिए संविधान के नाम पर भी किसी प्रकार की गंदी या विभाजनकारी राजनीति नहीं होनी चाहिए। लोकतंत्र का उद्देश्य समाज को जोड़ना, न्याय और समानता को मजबूत करना तथा प्रत्येक नागरिक के सम्मान की रक्षा करना है।
श्याम गुप्ता ने कहा कि हमें अपने संतों के उपदेशों को केवल मंचों और नारों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उनके बताए मार्ग पर चलकर समाज में प्रेम, भाईचारा, सद्भाव और राष्ट्रहित की भावना को मजबूत करना चाहिए। कौन पाप कर रहा है और कौन पुण्य—इसका अंतिम हिसाब ऊपर बैठी उस शक्ति के पास है, जो सब कुछ देख रही है।
उन्होंने समाज से आह्वान किया कि जाति, धर्म और पंथ से ऊपर उठकर मानवता तथा राष्ट्रहित को प्राथमिकता दें और संतों की वास्तविक शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारें।
