अहंकार से सर्वनाश की सीढ़ी इंसान खुद बनाता है : श्याम कुमार गुप्ता

सफलता के शिखर पर पहुंचकर विनम्रता न छोड़े मानव, वरना अहंकार बन सकता है पतन का सबसे बड़ा कारण

रायगढ़। आज के दौर में मानव विकास और सफलता की नई ऊंचाइयों को छू रहा है, लेकिन इसी सफलता के साथ बढ़ता अहंकार उसके लिए चिंता का विषय भी बनता जा रहा है। इसी सामाजिक और मानवीय प्रवृत्ति पर चिंतन व्यक्त करते हुए प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश सचिव श्याम कुमार गुप्ता ने कहा कि “अहंकार से सर्वनाश की सीढ़ी इंसान खुद बनाता है, और फिर उसी पर चढ़कर अपने पतन तक पहुंच जाता है।”
श्याम कुमार गुप्ता ने कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करना निश्चित रूप से बड़ी उपलब्धि है, लेकिन सफलता के साथ यदि विनम्रता, संस्कार और मानवता समाप्त हो जाए तो वही सफलता व्यक्ति के लिए विनाश का कारण बन सकती है। मनुष्य जब अपने पद, प्रतिष्ठा, धन, शक्ति या उपलब्धियों को लेकर अहंकार में डूब जाता है, तब वह अपने आसपास के लोगों के सम्मान और भावनाओं को नजरअंदाज करने लगता है।
उन्होंने कहा कि अहंकार व्यक्ति को वास्तविकता से दूर कर देता है। उसे अपनी गलतियां दिखाई नहीं देतीं और वह स्वयं को दूसरों से श्रेष्ठ समझने लगता है। यही सोच धीरे-धीरे उसके रिश्तों, सम्मान और सामाजिक विश्वास को कमजोर करती है और अंततः उसके पतन का मार्ग तैयार करती है।
प्रदेश सचिव श्याम कुमार गुप्ता ने कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपरा सदैव विनम्रता को महानता का आधार मानती रही है। वास्तविक महान व्यक्ति वही है जो ऊंचाइयों पर पहुंचने के बाद भी जमीन से जुड़ा रहे और अपनी सफलता का उपयोग समाज एवं मानवता के हित में करे।
उन्होंने युवाओं और समाज के प्रत्येक वर्ग से आह्वान किया कि सफलता के साथ संस्कार, शक्ति के साथ संयम और सम्मान के साथ विनम्रता को बनाए रखें। क्योंकि व्यक्ति की पहचान केवल उसकी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार और उसके द्वारा समाज के लिए किए गए कार्यों से होती है।
श्याम कुमार गुप्ता का संदेश स्पष्ट है—
“अहंकार सफलता की ऊंचाई नहीं, बल्कि विनाश की पहली सीढ़ी है। इसलिए जीवन में जितना ऊपर उठें, उतना ही विनम्र बने रहें।”
